कभी आर्थिक कठिनाइयों के बीच परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए संघर्ष करने वाली मुरैना जिले की कीचोल पंचायत की श्रीमती सरोज आज अपने आत्मविश्वास, मेहनत और स्व-सहायता समूह से मिले सहयोग के बल पर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं। आज वे न केवल स्वयं की आजीविका संचालित कर रही हैं, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार और आजीविका गतिविधियों से जुड़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं।

श्रीमती सरोज बताती हैं कि एक समय ऐसा था, जब आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने के कारण परिवार की जरूरतों को पूरा करना चुनौतीपूर्ण था। इसी दौरान आजीविका मिशन के माध्यम से वे स्व-सहायता समूह से जुड़ीं। समूह की बैठकों और गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी ने उनमें आगे बढ़ने का विश्वास पैदा किया। समूह के माध्यम से ऋण की सुविधा मिलने के बाद उन्होंने अपनी आजीविका गतिविधियों को विस्तार दिया। साथ ही समूह से जुड़ी अन्य महिलाओं को भी ऋण उपलब्ध कराने में सहयोग किया गया, जिससे उन्होंने बकरी पालन सहित विभिन्न आजीविका गतिविधियां शुरू कीं। धीरे-धीरे इन महिलाओं की आय बढ़ने लगी और उनके जीवन में भी आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद जगी।

समूह से मिले सहयोग और अपनी मेहनत से सरोज ने स्वयं के लिए लैपटॉप खरीदा। आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें सीएससी आईडी भी प्राप्त हुई। अब उनका सीएससी केंद्र गांव के लोगों के लिए सुविधा का माध्यम बन गया है। यहां वे फोटोकॉपी, विभिन्न ऑनलाइन आवेदन, आयुष्मान कार्ड बनाने सहित अनेक ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं। इससे ग्रामीणों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती और सरोज को भी अपनी आय बढ़ाने का अवसर मिला है।

सरोज यहीं नहीं रुकीं। वे पेंटर के रूप में भी कार्य करती हैं तथा सीआरपी के रूप में लोक अधिकार केन्द्र से जुड़े कार्य भी कर चुकी हैं। अलग-अलग आजीविका गतिविधियों को अपनाकर उन्होंने अपनी मेहनत और हुनर को आय के साधन में बदला। वर्तमान में इन गतिविधियों से उनकी वार्षिक आय लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच गई है।

अपने अनुभव को साझा करते हुए सरोज कहती हैं कि स्व-सहायता समूह से जुड़ना उनके जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुआ। समूह से उन्हें केवल आर्थिक सहयोग ही नहीं मिला, बल्कि आगे बढ़ने का हौसला और अपने पैरों पर खड़े होने का अवसर भी मिला। आज उनकी कोशिश है कि जिस तरह उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला, उसी तरह गांव की दूसरी महिलाएं भी अपने हुनर और मेहनत के माध्यम से आर्थिक रूप से सशक्त बनें।

श्रीमती सरोज प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहती हैं कि महिलाओं को स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आजीविका से जोड़ने की पहल ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। उनके लिए समूह केवल आर्थिक सहयोग का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत बना है। आज वे अपने अनुभव के माध्यम से दूसरी महिलाओं को भी यही संदेश दे रही हैं कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिले तो मेहनत के बल पर जीवन की दिशा बदली जा सकती है।