मंदसौर जिले के किसान गोपाल माली ने परंपरागत खेती से हटकर औषधि फसल चिया सीड की खेती को अपनाकर अपनी खेती को लाभ का धंधा बनाया है। जिले के सीतामऊ विकासखंड के ग्राम नाटा राम के रहने वाले गोपाल माली ने नवाचार करते हुए चिया सीड की खेती की है जिससे लाभ कमाया है।

नवाचार से पहले गोपाल पारंपरिक फसल जैसे गेहूं सरसों इत्यादि लेते थे जिसमें लागत अधिक थी उत्पादन उतना नहीं मिल रहा था फसल का बाजार में अधिक दाम भी नहीं था गोपाल ने आत्मा परियोजना अंतर्गत चिया सीड की वैज्ञानिक खेती का मार्गदर्शन लिया। वैज्ञानिक ने किसान को खेती के लिए जरूरी सलाह तथा आत्मा परियोजना से नि:शुल्क बीज उपलब्ध करवाया।

नवाचार से पहले गेहूं की फसल लेने में किसान को प्रति बीघा 17 हजार 300 रुपए खर्च आता था। चिया सीड की खेती में उसकी प्रतिबिघा 10 हजार 100 रुपए लागत आई चिया सीड की खेती में प्रति बीघा ढाई क्विंटल का उत्पादन प्राप्त हुआ। जिसके बाजार मूल्य के हिसाब से शुद्ध लाभ में अधिक वृद्धि हुई। गेहूं की खेती में किसान को प्रति बीघा 31 हजार 500 रूपये की आमदनी होती थी।

परंतु चिया सीड्स की खेती में उसकी प्रति बीघा 37 हजार 500 रूपये की आमदनी हुई इस प्रकार गोपाल माली ने अपनी खेती को आत्मा परियोजना की मदद से लाभ का धंधा बनाया इसके लिए गोपाल माली,प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को धन्यवाद देता है।