पीएमश्री केन्द्रीय विद्यालय बड़वानी मे हिन्दी माह के अंतर्गत प्रतिदिन प्रार्थना सभा मे विभिन्न प्रस्तुतियाँ व गतिविधियां आयोजित की जा रही है। आज प्रातः सभा की प्रस्तुति के रूप में विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य श्री कुन्दन राठौर के मार्गदर्शन मे कक्षा तीसरी के विद्यार्थियो द्वारा महर्षि धौम्य और उनके आज्ञाकारी शिष्य आरुणि की प्रेरणादायक कथा का नाटक के रूप मे मंचन किया गया।

प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियो को गुरु भक्ति, आज्ञापालन, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा जैसे जीवन-मूल्यो से परिचित करना रहा। संक्षेप्त मे कथा - महर्षि धौम्य के आश्रम मे दूर-दूर से लोग शिक्षा ग्रहण करने आते थे, उनके आश्रम मे ही बालक आरुणि, जो गुरु कि हर एक आज्ञा को अपने जीवन का सर्वाेच्च कर्तव्य मानता था, शिक्षा ग्रहण करता था। एक दिन खेत मे मेड़ टूट गई और पानी बहने लगा।

गुरु ने आरुणि को मेड़ ठीक करने के लिए भेजा। बहुत प्रयास करने पर भी जब वह मेड़ को रोक नहीं पाया, तो अरुणि स्वयं मेड़ की जगह लेट गया और अपने शरीर से पानी का बहाव रोक दिया। जब काफी देर तक आरुणि वापस नहीं आया, तो महर्षि धौम्य उसे खोजने खेत पर पहुँचे। उन्होने आरुणि को वहाँ लेटे हुए देखा।

उसकी गुरु के प्रति निष्ठा और समर्पण देखकर गुरु बहुत प्रसन्न हुए और उसे आशीर्वाद दिया कि वत्स तुमने जिस प्रकार इस खेत कि रक्षा कि है उसी प्रकार समस्त वेदो और ज्ञान का प्रकाश तुमहारे जीवन को आलोकित करेगा। इसी कारण आरुणि की कथा गुरु - शिष्य परंपरा मे आदर्श आज्ञापालन और समर्पण का उदाहरण मानी जाती है।

नाटक मे विभिन्न पात्रो की भूमिका निभाने वाले विद्यार्थियो मे महर्षि धौम्य अबीर पाराशर, शिष्य आरुणि रेयांश पटीदार, वेद और उपमन्यु देवांश सिंह किराड़े और कवीश बामनिया रहे एवं सूत्रधार की भूमिका दिव्यान्शी ने निभाई साथ ही मंच निर्देशन कक्षा तीसरी के कक्षाध्यापक श्री हिमांशु चौहान द्वारा किया गया। कार्यक्रम के दौरान अनायज़ा फातिमा शेख़ को आमंत्रित कर उनसे नाटक देखने के बाद प्राप्त संदेश साझा करने के लिए कहा गया।

उन्होने बताया की इस कथा मे उन्हे अपने शिक्षकों का सम्मान करने, उनकी बात ध्यानपूर्वक सुनने तथा उनके मार्गदर्शन का पालन करने की प्रेरणा मिली। साथ ही विद्यार्थियो के आग्रह पर प्रभारी प्राचार्य श्री कुंदन राठौर द्वारा प्रतिदिन “आज का सरताज” गतिविधि में हिंदी माह के अंतर्गत भारतीय संस्कृति विषय पर भगवान गणेश जी से संबंधित रोचक एवं ज्ञानवर्धक प्रश्नोत्तरी भी आयोजित की गई।

इस दौरान विद्यार्थियों से विभिन्न प्रश्न पूछे गए, जिनके उत्तर उन्होंने उत्साहपूर्वक दिए। सही उत्तर देने वाले विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए सम्मानित किया गया। प्रश्नोत्तरी के माध्यम से विद्यार्थियों के सामान्य ज्ञान, जिज्ञासा एवं सहभागिता को बढ़ावा देने के साथ भारतीय संस्कृति और परंपराओं के प्रति उनकी रुचि को भी प्रोत्साहित किया गया।

पूछे गए प्रश्नों में प्रमुख रूप से गणेशजी को कौन सी विशेष प्रसादी चढ़ाई जाती है, लंबा है उदर जिसका अर्थात गणेशजी; उदर का मतलब बताइये, गणेश जी को दूर्वा चढ़ाई जाती है, दूर्वा क्या है, गणेशजी के बड़े-बड़े कान हमे जीवन मे क्या सीख देते है, गणेश जी का पेट बड़ा क्यो होता है, विद्यार्थियो ने उत्साहपूर्वक इन सभी प्रश्नो के उत्तर दिए।

कार्यक्रम के अंत मे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों की सक्रिय सहभागिता की सराहना की गई। सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों के उत्साह एवं प्रयासों ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। विद्यालय मे भविष्य मे भी इस प्रकार की रचनात्मक एवं ज्ञानवर्धक गतिविधियों के निरंतर आयोजन कराने की भावना विकसित होने के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।