किसी बच्चे के लिए दुनिया को अपनी आंखों से देख पाना जितना सामान्य है, उतना ही अनमोल उन परिवारों के लिए है जिनके बच्चे जन्म से ही दृष्टि संबंधी गंभीर समस्या से जूझ रहे हों। बालाघाट जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) ऐसे ही बच्चों के जीवन में उम्मीद की रोशनी लेकर आ रहा है।

स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चिन्हित किए गए छह बच्चों को उपचार एवं सर्जरी के लिए नागपुर भेजा गया, जहां उनकी आंखों की जटिल बीमारियों का उपचार किया गया।

सर्जरी के बाद अब इन बच्चों के जीवन में दुनिया को देखने की नई उम्मीद जगी है।कलेक्टर कुमार सत्यम के निर्देशन एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शत्रुघ्न दाहिया के मार्गदर्शन में आरबीएसके टीम द्वारा बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान दृष्टि संबंधी समस्या वाले बच्चों को चिन्हित किया गया। इन बच्चों को जिला चिकित्सालय स्थित जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र (डीईआईसी) भेजा गया।

यहां जिला शीघ्र हस्तक्षेप प्रबंधक राजाराम चक्रवर्ती की पहल पर चिकित्सकीय जांच कर आगे के उपचार की प्रक्रिया शुरू की गई।

चार नवजात रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्योरिटी से पीड़ित मिले

डीईआईसी में चिकित्सालय की टीम की डॉ. अदिति विधा एवं डॉ. उन्नति पिछोड़े द्वारा बच्चों की आंखों की जांच की गई। जांच में चार नवजात बच्चों में रेटिनोपैथी ऑफ प्रीमेच्योरिटी (ROP) की समस्या सामने आई।

इनमें ग्राम कावेली कुल्‍पा, तहसील परसवाड़ा की बेबी ऑफ श्यामा बाई, उम्र 23 दिन; माटे चालीस बोड़ी, तहसील परसवाड़ा निवासी रूपेश माधवी, पिता राकेश मरावी, उम्र 24 दिन; ग्राम घोटी, लांजी निवासी बेबी ऑफ नंदिनी घोरमारे, उम्र 21 दिन तथा ग्राम गोरेघाट, कटंगी निवासी बेबी ऑफ मीणा जमुनपाने, पिता अखिलेश जमुनपाने, उम्र 23 दिन शामिल हैं।समय रहते बीमारी की पहचान होने से इन बच्चों को उच्च स्तरीय उपचार के लिए नागपुर भेजा गया।

परिजनों के लिए यह उपचार इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा, क्योंकि इतनी कम उम्र में बच्चों की दृष्टि संबंधी समस्या का समय पर उपचार उनके भविष्य के लिए बेहद अहम है।

जन्मजात मोतियाबिंद से जूझ रहे दो बच्चों की भी हुई सर्जरी

इसी प्रकार जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित दो बच्चों को भी उपचार के लिए नागपुर भेजा गया। इनमें कुशाल कोड़पे, उम्र 18 वर्ष, निवासी अकोला, किरनापुर तथा संजय उइके, उम्र 11 वर्ष, निवासी लातरी बिठली शामिल हैं। दोनों बच्चों की नागपुर में सर्जरी हो चुकी है। इस तरह आरबीएसके के माध्यम से चिन्हित किए गए छह बच्चों को आंखों से संबंधित गंभीर समस्याओं के उपचार का अवसर मिला है। उपचार के बाद अब इन बच्चों के जीवन में दृष्टि को लेकर नई उम्मीद पैदा हुई है।

परिजनों ने कहा—बच्चों के लिए वरदान है आरबीएसके

बच्चों के परिजनों ने राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम को बच्चों के लिए वरदान बताया। उनका कहना है कि यदि आरबीएसके टीम द्वारा समय पर बच्चों की जांच नहीं की जाती तो बीमारी की पहचान और उपचार में देरी हो सकती थी।

योजना के माध्यम से गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों का निःशुल्क उपचार और सर्जरी संभव हुई है।परिजनों ने अन्य अभिभावकों से भी अपील की है कि बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण को गंभीरता से लें और आरबीएसके टीम द्वारा किसी समस्या की पहचान किए जाने पर आगे की जांच एवं उपचार अवश्य कराएं।

समय पर बीमारी की पहचान और उपचार से बच्चों के बेहतर भविष्य की राह आसान हो सकती है।आरबीएसके के माध्यम से स्वास्थ्य परीक्षण से लेकर डीईआईसी में जांच और फिर उच्च चिकित्सा केंद्र तक उपचार की व्यवस्था ने इन छह बच्चों के परिवारों को बड़ी राहत दी है। अब उम्मीद है कि ये बच्चे स्वस्थ होकर अपनी आंखों से दुनिया की खूबसूरती देख सकेंगे।